Friday, October 31, 2008

Zindagi

अजीब है यह ज़िन्दगी
अनजान है इसकी राह
हर मोड़ हर कदम पर
मैं हूँ तन्हां ।
कहने को तो है सब साथ
लेकिन आगे बढ़ते ही छूटता है हाथ
यही है ज़िन्दगी की पहेचान
पर समझ मैं आई मुझे कुछ देर के baad
रोको तो ना रूकती है यह ज़िन्दगी
बस आगे ही बढती जाती है
बीती हुई बात सिर्फ़ यांदें बनकर रह जाती है
तो दोस्तों !!!!!
इन यांदों के भंवर मैं ज़िन्दगी की लहर को
तैर कर पार करो हिम्मत से
कभी न लो साहारा
यही है कहना हमारा
अगर ऐसा करोगे
तो सुरक्षित पहुच जाओ गे अपनी मंजिल का किनारा.

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